अध्याय 8
Reprint 2025-26
हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'गीत-अगीत' अपनी गहन अर्थवत्ता और सरल अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। दिनकर ओज के कवि माने जाते हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं में देश और युग के सत्य के प्रति सजगता दिखाई है।
इस इंटरैक्टिव पाठ में हम दिनकर के जीवन, उनकी कविता 'गीत-अगीत' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। कविता के माध्यम से प्रकृति के सौंदर्य, जीव-जंतुओं के ममत्व और मानवीय राग-प्रेमभाव को समझेंगे।
प्रस्तुत कविता 'गीत-अगीत' में भी प्रकृति के सौंदर्य के अतिरिक्त जीव-जंतुओं के ममत्व, मानवीय राग और प्रेमभाव का भी सजीव चित्रण है। कवि को नदी के बहाव में गीत का सृजन होता जान पड़ता है, तो शुक-शुकी के कार्यकलापों में भी गीत सुनाई देता है और आल्हा गाता प्रेमी तो गीत-गान में निमग्न दिखाई देता ही है।
कवि का मानना है कि गुलाब, शुकी और प्रेमिका प्रत्यक्ष रूप से गीत-सृजन या गीत-गान भले ही न कर रहे हों, पर दरअसल वहाँ गीत का सृजन और गान भी हो रहा है। कवि की दुविधा महज इतनी है कि उनका वह अगीत (जो गाया नहीं जा रहा, महज़ इसलिए अगीत है) सुंदर है या प्रेमी द्वारा सस्वर गाया जा रहा गीत?
गीत और अगीत के अंतर पर विचार कीजिए। आपके अनुसार, कौन सा अधिक सुंदर है - वह जो सुनाई देता है या वह जो मन में छुपा रहता है? आधुनिक संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
कविता में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ जानिए:
तटिनी का अर्थ है ।
वेगवती का अर्थ है ।
उपलों का अर्थ है ।
विधाता का अर्थ है ।
निर्झरी का अर्थ है ।
पाटल का अर्थ है ।
कविता में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप उदाहरण के अनुसार लिखिए:
उदाहरण - तटिनी → नदी
वेगवती का प्रचलित रूप है:
उपलों का प्रचलित रूप है:
विधाता का प्रचलित रूप है:
निर्झरी का प्रचलित रूप है:
पाटल का प्रचलित रूप है:
शुक का प्रचलित रूप है:
खोंते का प्रचलित रूप है:
गुनती है का प्रचलित रूप है:
दिनकर के जीवन के बारे में सुनिए और नोट्स बनाइए। फिर पहले बॉक्स में अपने नोट्स और दूसरे बॉक्स में एक कथात्मक विवरण लिखिए।
दिनकर की निम्नलिखित कविता पर विचार कीजिए:
इस कविता का अर्थ अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए। आपके विचार से प्रकृति में कैसे गीत छुपे होते हैं? अपने विचार अपने साथी से साझा कीजिए।
रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया गाँव में 30 सितंबर 1908 को हुआ था। वे सन् 1952 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत किए गए। भारत सरकार ने इन्हें 'पद्मभूषण' अलंकरण से भी अलंकृत किया। दिनकर जी को 'संस्कृति के चार अध्याय' पुस्तक पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। अपनी काव्यकृति 'उर्वशी' के लिए इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
दिनकर की प्रमुख कृतियाँ हैं: हुँकार, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा, उर्वशी और संस्कृति के चार अध्याय। दिनकर ओज के कवि माने जाते हैं। इनकी भाषा अत्यंत प्रवाहपूर्ण, ओजस्वी और सरल है। दिनकर की सबसे बड़ी विशेषता है अपने देश और युग के सत्य के प्रति सजगता।